भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक और ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह (CWG) का तीन दिवसीय वैश्विक समागम ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ संपन्न हो गया। ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भारतीय भावना और “Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” की थीम पर आधारित इस सम्मेलन ने अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कूटनीति को नई ऊंचाई दी। कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस आयोजन में भारत सहित 14 देशों के 55 उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
ब्रिक्स के 10 सदस्य देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों के अलावा बेलारूस, क्यूबा, कजाकिस्तान और थाईलैंड जैसे साझेदार देशों की भागीदारी ने सम्मेलन को वैश्विक स्वरूप प्रदान किया। इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और यूएई के संस्कृति मंत्रियों की प्रत्यक्ष उपस्थिति और मिस्र के मंत्री की वर्चुअल भागीदारी ने इसे और महत्वपूर्ण बना दिया।
इस सम्मेलन की शुरुआत अप्रैल 2026 में वर्चुअल बैठक से हुई थी, जिसके बाद जून में वाराणसी और अगस्त में भोपाल में आयोजित बैठकों की श्रृंखला के बाद 8 अगस्त को ‘भोपाल घोषणा पत्र’ को सर्वसम्मति से अपनाया गया। यह घोषणा पत्र केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग, डिजिटल नवाचार और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का ठोस रोडमैप है।
घोषणा पत्र में सांस्कृतिक एवं रचनात्मक उद्योगों को आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ माना गया है। साथ ही कलाकारों के अधिकारों की सुरक्षा, डिजिटल युग में कॉपीराइट पारदर्शिता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग में नैतिक मानकों को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए संस्थागत ढांचे की भी घोषणा की गई है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और यूनेस्को नामांकन से बढ़ेगा वैश्विक सांस्कृतिक सहयोग, प्रतिनिधियों ने सराहा मध्यप्रदेश का आतिथ्य
भोपाल सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में भारत द्वारा प्रस्तावित ‘स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री’ रही, जिसे सभी देशों ने स्वीकार किया। इसके तहत एक साझा ब्रिक्स डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जहां सदस्य देशों के कलाकारों, शिल्पकारों और रचनात्मक उद्यमियों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध होगी। यह प्लेटफॉर्म न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को गति देगा, बल्कि कलाकारों को वैश्विक बाजार से जोड़ने में भी मदद करेगा।
इसके साथ ही, ब्रिक्स देशों ने यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में संयुक्त नामांकन भेजने पर भी सहमति जताई। यह कदम साझा सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करेगा। घोषणा पत्र में सांस्कृतिक संपदा की तस्करी रोकने, अवैध रूप से हटाई गई धरोहरों की वापसी और AI आधारित ट्रैकिंग तकनीकों के उपयोग पर भी बल दिया गया है।
सम्मेलन के दौरान आयोजित सांस्कृतिक भ्रमण कार्यक्रमों ने प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत से रूबरू कराया। प्रतिनिधियों ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल हेरिटेज वॉक, वन विहार और बड़ा तालाब का भ्रमण किया। इसके अलावा सांची और भीमबेटका जैसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों का दौरा उनके लिए विशेष आकर्षण रहा।
सांची स्तूप और भीमबेटका के प्रागैतिहासिक शैलचित्रों को देखकर विदेशी प्रतिनिधि अभिभूत नजर आए। इंडोनेशिया के संस्कृति मंत्री फदली ज़ोन ने इसे “अद्भुत और प्रेरणादायक अनुभव” बताया, वहीं क्यूबा के राजदूत जुआन कार्लोस मार्सन ने ‘भोपाल घोषणा पत्र’ को वैश्विक सांस्कृतिक सहयोग में मील का पत्थर कहा। दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के प्रतिनिधियों ने भी मध्यप्रदेश की विरासत और आतिथ्य की सराहना की।
इस दौरान आयोजित ‘ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव’ भी आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें विभिन्न देशों के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘ब्रिक्स पीस सॉन्ग’ की सामूहिक प्रस्तुति ने “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के संदेश को वैश्विक स्वर दिया।
मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत करने वाली ‘अमृतस्य मध्यप्रदेश’ नृत्य-नाट्य प्रस्तुति ने राज्य की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा को जीवंत किया। वहीं ‘प्रोजेक्ट मौसम’, ‘बृहत्तर भारत’ और ‘ज्ञान भारतम्’ प्रदर्शनियों ने भारत की प्राचीन सभ्यता, समुद्री संपर्कों और ज्ञान परंपरा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा आयोजित आतिथ्य कार्यक्रमों और द्विपक्षीय बैठकों ने इस सम्मेलन को और अधिक सार्थक बनाया। इस आयोजन ने न केवल मध्यप्रदेश को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर नई पहचान दी, बल्कि यह भी साबित किया कि सांस्कृतिक कूटनीति वैश्विक शांति, सहयोग और समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बन चुकी है।
भोपाल से निकला “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का संदेश अब विश्वभर में सांस्कृतिक एकता और सहयोग का नया मार्ग प्रशस्त करेगा।
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