अपनों के घरों में खुशियों के दीप जलाने पहुंचे समाजसेवी अजय वर्मा, बच्चों को बांटे दीपक और पटाखे

7 दिन पहले से शुरू किया दीपावली खुशियां बांटने का अभियान, आदिवासी बस्तियों से लेकर शहर की गरीब बस्तियों तक पहुंचकर हर परिवार को दी मिठाई

टीकमगढ़। दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने और रोशनी करने का त्योहार नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में खुशियां बांटने और जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाने का भी अवसर है। इसी भावना को साकार करते हुए लोकप्रिय समाजसेवी अजय वर्मा ने इस बार दीपावली पर अनूठी पहल की। उन्होंने त्योहार से सात दिन पहले ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बीच पहुंचकर दीपावली की खुशियां बांटने का अभियान शुरू किया। इस दौरान उन्होंने परिवारों को मिट्टी के दीपक, मिठाइयां वितरित कीं, वहीं बच्चों को फुलझड़ी, अनार, चकरी सहित विभिन्न प्रकार के पटाखे भेंट किए, ताकि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी बच्चे की दीपावली फीकी न रहे।

समाजसेवी अजय वर्मा ने टीकमगढ़ के आसपास की आदिवासी ग्रामीण बस्तियों में पहुंचकर विशेष रूप से उन परिवारों को चिन्हित किया, जिन्हें वास्तव में सहायता की आवश्यकता है। अनगढ़ा, आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों, तखा का मझरा, बड़ागांव सहित आसपास की ग्रामीण बस्तियों में रहने वाले कमजोर वर्ग के परिवारों के बीच पहुंचकर उन्होंने दीपावली की सामग्री वितरित की। इसके साथ ही टीकमगढ़ शहर और आसपास के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवारों तथा जरूरतमंद बच्चों और उनके परिजनों के बीच भी पहुंचकर दीपावली की खुशियां साझा कीं। अजय वर्मा की इस पहल का सबसे भावुक पहलू उन बच्चों के चेहरे पर दिखाई दिया, जिनके परिवार आर्थिक तंगी के चलते दीपावली पर दीपक और पटाखे तक खरीदने में असमर्थ थे। जब इन बच्चों के हाथों में फुलझड़ियां, चकरी और अनार पहुंचे तो उनके चेहरों पर खुशी देखते ही बन रही थी। वहीं प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक मिठाई और मिट्टी के दीपक पहुंचाकर उन्होंने यह संदेश दिया कि त्योहार की असली खुशी तभी है, जब समाज का अंतिम व्यक्ति भी उसमें शामिल हो।

*सेवा का सिलसिला केवल दीपावली तक सीमित नहीं*
समाजसेवी अजय वर्मा लंबे समय से जरूरतमंदों की मदद और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनका सेवा कार्य केवल त्योहारों तक सीमित नहीं है। पूर्व में वे भीषण गर्मी के दौरान मजदूर वर्ग, चौराहों पर मजदूरी की तलाश में खड़े रहने वाले श्रमिकों और हाथ ठेला चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले लोगों के बीच पहुंचकर ग्लूकोज और तौलिये वितरित कर चुके हैं, ताकि गर्मी और लू के प्रकोप से उन्हें राहत मिल सके। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में भी अजय वर्मा आगे आकर सहायता राशि प्रदान करते रहे हैं। जरूरतमंद कन्याओं के विवाह में आर्थिक सहयोग देकर उन्होंने कई परिवारों की मुश्किलें कम करने का प्रयास किया है। वहीं सर्दियों के मौसम में गरीब और असहाय लोगों के बीच पहुंचकर कंबल वितरण कर उन्हें ठंड से बचाने का कार्य भी लगातार करते आ रहे हैं।

*अजय वर्मा की पहल ने दिया सामाजिक एकजुटता का संदेश*
दीपावली के अवसर पर आदिवासी बस्तियों से लेकर शहर की गरीब बस्तियों तक पहुंचकर मिट्टी के दीपक, मिठाइयां और बच्चों को पटाखे वितरित करने की इस पहल ने समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया है। अजय वर्मा का प्रयास है कि आर्थिक अभाव किसी परिवार की त्योहार मनाने की खुशी को कम न कर सके और हर बच्चे को दीपावली की खुशियों में शामिल होने का अवसर मिले। उनकी इस पहल ने एक बार फिर यह साबित किया कि समाजसेवा केवल बड़े आयोजनों या मंचों तक सीमित नहीं होती, बल्कि जरूरतमंदों के घर तक पहुंचकर उनके दुख-दर्द को समझना और उनकी खुशियों में सहभागी बनना ही सच्ची मानव सेवा है।