वीआईपी मूवमेंट से पहले नींद से जागा प्रशासन: हादसे के बाद नहीं जगी सुध, सीएम दौरे की खबर मिलते ही शुरू हुआ सड़क सुधार
टीकमगढ़। शहर की बदहाल सड़कों और खतरनाक गड्ढों ने एक बार फिर स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था के दावों की पोल खोलकर रख दी है। आम जनता लंबे समय से जर्जर सड़क और आए दिन होने वाले हादसों का दंश झेलने को मजबूर थी, लेकिन प्रशासन की कुंभकर्णी नींद तब तक नहीं टूटी जब तक कि मुख्यमंत्री के आगमन की आहट नहीं हुई।21 अगस्त को प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का टीकमगढ़ दौरा प्रस्तावित है। कार्यक्रम की तैयारियों के बीच अचानक लोक निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन को शहर की खस्ताहाल सड़कों की याद आ गई। आनन-फानन में मशीनों को उतारकर सड़क सुधार और गड्ढे भरने का काम शुरू कर दिया गया है।प्रशासन की इस 'त्वरित कार्रवाई' ने राहत से ज्यादा शहरवासियों के मन में आक्रोश पैदा कर दिया है।जनता पूछ रही तीखे सवाल:
- हादसे के बाद क्यों नहीं जागी सुध? जब जर्जर सड़क के कारण लगातार हादसे हो रहे थे, तब मरम्मत क्यों नहीं कराई गई?
- क्या जनता की जान की कोई कीमत नहीं? क्या प्रशासनिक अमला सिर्फ वीआईपी दौरों में 'सब ठीक है' का दिखावा करने के लिए ही काम करता है?
- सिर्फ दिखावा या स्थायी समाधान? क्या यह केवल मुख्यमंत्री की नजरों से बदहाली छुपाने के लिए लीपापोती है, या सड़क का गुणवत्तापूर्ण निर्माण होगा?
स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि जनता महीनों से शिकायतें दर्ज करा रही थी, लेकिन समाधान तब शुरू हुआ जब अधिकारियों को 'साहब' की नाराजगी का डर सताने लगा। अब देखना यह होगा कि वीआईपी दौरे के नाम पर भरा जा रहा यह पैचवर्क बारिश की अगली बौछार झेल पाता है या फिर दौरे के खत्म होते ही सड़क दोबारा पुराने ढर्रे पर लौट आएगी।
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