दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, लेकिन इस बार मुकाबला पहले से अलग और ज्यादा दिलचस्प माना जा रहा है। इसकी बड़ी वजह पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को मिली सजा के बाद बदले सियासी समीकरण हैं। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की रणनीति और चुनावी गणित दोनों को प्रभावित किया है।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 6 जुलाई को अधिसूचना जारी होगी, 13 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे और 30 जुलाई को मतदान होगा। वहीं 3 अगस्त को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे। आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है।
राजेंद्र भारती की सजा के बाद कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजबूत और भरोसेमंद उम्मीदवार खड़ा करने की है। भारती का दतिया क्षेत्र में प्रभाव रहा है, लेकिन उनके चुनावी मैदान से बाहर होने की स्थिति ने पार्टी की रणनीति को बदल दिया है। अब कांग्रेस को नए चेहरे या वैकल्पिक नेतृत्व पर दांव लगाना पड़ सकता है, जिससे संगठन के भीतर भी नई हलचल देखी जा रही है।
दूसरी ओर भाजपा इस बदले समीकरण को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश में जुटी है। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, जिनका दतिया में मजबूत जनाधार माना जाता है, इस पूरे चुनाव में केंद्रीय भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। संगठन स्तर पर भी भाजपा पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजेंद्र भारती के सजा प्रकरण ने इस उपचुनाव को सीधा मुकाबला से हटाकर रणनीतिक लड़ाई में बदल दिया है। जहां पहले मुकाबला व्यक्तित्व आधारित माना जा रहा था, वहीं अब यह संगठन, रणनीति और नए समीकरणों की परीक्षा बन गया है।
30 जुलाई को होने वाले मतदान के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। वहीं चुनाव आयोग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीनों के उपयोग की व्यवस्था की है।
कुल मिलाकर दतिया उपचुनाव इस बार कई मायनों में खास हो गया है। एक तरफ कांग्रेस बदले हालात में खुद को संभालने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा इस मौके को जीत में बदलने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। अब देखना होगा कि बदले हुए सियासी समीकरणों के बीच दतिया की जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है।
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