दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राजनीति को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अब उनका पूरा ध्यान धर्म रक्षा के कार्यों पर रहेगा। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अब वह सक्रिय राजनीति नहीं करेंगे और अपना शेष जीवन धर्म की सेवा तथा धार्मिक जागरण के लिए समर्पित करेंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "अब मैं राजनीति नहीं करूंगा। अंतिम सांस तक धर्म की रक्षा के लिए काम करूंगा।"
दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह अब न राजनीतिक भाषण देंगे और न ही किसी राजनीतिक विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर भी अपनी ओर से कोई पोस्ट नहीं लिखेंगे। उनके अनुसार अब उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल धर्म और आस्था से जुड़े कार्यों के लिए सक्रिय रहना है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि वह इस वर्ष दशहरे के अवसर पर उज्जैन से अयोध्या तक धार्मिक यात्रा पर निकलेंगे। उन्होंने कहा कि यह यात्रा पूरी तरह धार्मिक होगी और इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस यात्रा के लिए वह किसी राजनीतिक नेता को आमंत्रित नहीं करेंगे। यहां तक कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी इस यात्रा का निमंत्रण नहीं दिया जाएगा।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस यात्रा के मुख्य अतिथि राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कारसेवक संतोष दुबे होंगे। उन्होंने बताया कि संतोष दुबे उन कारसेवकों में शामिल रहे हैं जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान गोलियां खाई थीं। उनके अनुसार ऐसे लोगों का सम्मान किया जाना चाहिए जिन्होंने अपने विश्वास के लिए संघर्ष किया।
उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अब 80 वर्ष के हो चुके हैं और पार्टी ने उन्हें जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें पांच बार विधायक बनने का अवसर दिया, दो बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा भेजा। इसके लिए उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस नए नेतृत्व को आगे बढ़ाए। उन्होंने पार्टी से कहा है कि अब किसी और को जिम्मेदारी दी जाए।
दिग्विजय सिंह ने दोहराया कि उनका आगामी जीवन केवल धर्म रक्षा और धार्मिक मूल्यों के संरक्षण के लिए समर्पित रहेगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान में किसी प्रकार की राजनीति नहीं होगी और वह किसी राजनीतिक मंच या कार्यक्रम में भी सक्रिय भूमिका नहीं निभाएंगे। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिग्विजय सिंह के इस ऐलान का कांग्रेस की भविष्य की रणनीति और मध्य प्रदेश की राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में वह सक्रिय राजनीति से पूरी तरह दूरी बनाते हैं या सार्वजनिक जीवन में किसी अन्य भूमिका के माध्यम से जुड़े रहते हैं।
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